सज्जनशक्तियों के बीच संवादहीनता की स्थिति को समाप्त कर उनके बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से के.एन. गोविन्दाचार्य द्वारा वर्ष 2004 में भारत विकास संगम का गठन किया गया। उनका मानना है कि सज्जन शक्तियों में संवाद बढ़ने से उनके बीच सहमति बढ़ेगी और फिर सभी सहकार्य करने के लिए तत्पर हो सकेंगे। परिणामस्वरूप सकारात्मक बदलाव की एक ऐसी बयार बहेगी जिससे इस देश का कायाकल्प हो जाएगा।
सज्जन शक्तियों को संगठित करने के साथ-साथ उनमें भारतपरस्त एवं गरीबपरस्त नीतियों के प्रति सहमति बनाना भी भारत विकास संगम का लक्ष्य है। इसकी नजर में ‘सबको भोजन सबको काम’ विकास की सबसे बड़ी कसौटी है। इसीलिए देश में कम पूंजी, कम लागत के प्रकल्पों को बढ़ावा देने पर यहां जोर दिया जाता है। इसी के साथ-साथ जीवनशैली और जीवनमूल्यों के स्तर पर भी देश में जनजागरण करने के प्रयास चल रहे हैं।हमारा जिला हमारी दुनिया :
भारत विकास संगम के मूल में है ‘हमारा जिला हमारी दुनिया’ का विचार। इसका व्यावहारिक रूप है-जिला विकास संगम। कर्नाटक में गुलबर्गा, कोप्पल, रायचूर, बीदर जिलों में इस परिकल्पना पर काफी काम किया गया है। इसी तरह कर्नाटक के बाहर भी पांच जिलों को माडल जिला बनाने का काम चल रहा है। इसमें राजस्थान का अलवर, उड़ीसा का कटक, आंध्रप्रदेश का आदिलाबाद, मध्य प्रदेश का झाबुआ और बिहार का वैशाली जिला शामिल है।
आने वाले समय में देश के हर जिले में जिला विकास संगम का काम तेज हो, इसके लिए प्रत्येक जिले को एक नई दृष्टि से जानने की कोशिश हो रही है। जिले के लोगों को जिले की जनसंख्या, प्राकृतिक संसाधन, जिले में विकास की मद में आने वाली राशि का हिसाब, जिले के राजस्व और आय का ब्यौरा, जिले का गेजेटियर, जिले की देशज ज्ञान परंपरा, जिले का अनोखापन क्या है, इन सब बातों को जानने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
संक्षेप में कहें तो अपने जिले को जानना और फिर स्वदेशी प्रक्षेत्र के लोगों को एक मंच पर ले आना ही जिला विकास संगम है। श्री के.एन. गोविन्दाचार्य कहते हैं कि स्वदेशी प्रक्षेत्र के लोग यानि- कम पूंजी और कम लागत में उत्पादन के ढांचे को चलाने वाले लोग, गोरक्षा, गोपालन, गोसेवा, गो आधारित कृषि, जैविक कृषि में लगे हुए लोग, प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद आदि परंपरागत चिकित्सा में लगे हुए लोग, जिले में जल, जंगल, जमीन, जन, जानवर और जुबान के क्षेत्र में बिना विदेशी सहायता के काम कर रहे लोग, मातृ शक्ति के क्षेत्र में लगे हुए लोग, स्थानिक कारीगरी, देशज ज्ञान में लगे हुए लोग, कला, लोकनृत्य आदि सांस्कृतिक गतिविधियों में लगे लोग, जिले की शिक्षा संस्थानों के संचालक, व्यापार मंडल के संचालक, वहां के नौजवानों के संगठन, समाज सुधार के क्षेत्र में लगे संगठन, पर्यावरण सुधार एवं रक्षा में लगे लोग, ऐसे संत-महात्मा जिनकी जिले में प्रतिष्ठा हो। इन सबको मिला कर जिले की शक्ति, श्रम, बुध्दि और संसाधन के आधार पर ‘सबको भोजन-सबको काम’ का लक्ष्य लेकर जिले के लोग इकट्ठा हो जाएं तो जिला ही नहीं भारत की भी तकदीर बदल जाएगी। जिला विकास संगम से जुड़े लोग किसी पारंपरिक संगठन के दायरे में बंधें, यह अपेक्ष नहीं की जाती है। जरूरी बस इतना ही है कि जिले के लोग किसी एक मंच पर आएं और पूर्वाग्रह मुक्त होकर अपने हित-अहित पर चर्चा करें। यहां आदेश और आज्ञापालन की कार्यसंस्कृति से बाहर निकल कर साहस, पहल और प्रयोग के लिए प्रेरित किया जाता है। यहां लोग ‘थिंक ग्लोबली एक्ट लोकली’ को नए भारत का नारा बनाना चाहते हैं।
वाराणसी सम्मेलन (नवंबर, 2004)
20 नवंबर, 2004 को वाराणसी में भारत विकास संगम का पहला सम्मेलन किया गया। इसमें देश भर के 116 जिलों से 64 बहुविध रचनात्मक एवं आंदोलनात्मक प्रकल्पों से जुड़े 372 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सम्मेलन में भाग लेने आए प्रतिनिधि विभिन्न वैचारिक धाराओं से जुड़े थे। लेकिन, वहां आए सभी लोगों का कम से कम एक उद्देश्य साझा था और वह था देश के आम आदमी की जिंदगी को खुशहाल बनाते हुए देश को दुनिया का सिरमौर बनाना। ये वे लोग थे जो सत्ता राजनीति के खेल से दूर रहते हुए विभिन्न प्रकार के रचनात्मक कार्यों में नि:स्वार्थ भाव से लगे हुए थे। आंकड़ों के हिसाब से देखें तो भारत विकास संगम के इस सम्मेलन में आए लोगों की संख्या कोई बहुत अधिक नहीं थी। लेकिन, आंकड़ों के परे का सत्य देखें तो इस छोटी सी संख्या के पीछे विशाल जन ज्वार खड़ा दिखाई देता था। यहां आने वाला व्यक्ति अपने आप में एक दुनिया समेटे हुए था। समाज को बदलने की अदम्य इच्छा व स्पष्ट चिंतन के साथ उसके मन में देश और समाज के प्रति पूर्ण समर्पण का भाव था। अपने प्रयोगों की सफलता से प्राप्त उत्साह और आत्मविश्वास के साथ सम्मेलन में आए प्रतिनिधि भारत के जन-जन के अंदर छिपी अक्षय ऊर्जा के प्रतीक थे। देश के कोने-कोने में काम कर रहे अपने जैसे तमाम लोगों को देख कर सभी में एक नए उत्साह का संचार हुआ। उन्हें अपने और अपने जैसे दूसरे लोगों के काम को देखने और समझने की एक नई दृष्टि प्राप्त हुई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह हुई कि प्रतिनिधियों को यह एहसास हुआ कि वे अलग-थलग नहीं हैं। उन्हें अपनी सामूहिक शक्ति और उसके दूरगामी प्रभाव का आकलन करने में मदद मिली।
चुनार सम्मेलन (जनवरी, 2008)
इसके बाद जनवरी, 2008 में भारत विकास संगम का आयोजन मिर्जापुर के चुनार में किया गया। पिछले संगम की तुलना में यहां आए लोगों की तादाद ज्यादा थी। देश भर के 90 छोटे-बड़े संगठन, संस्था और प्रकल्पों से जुडे तकरीबन साढ़े पांच सौ से ज्यादा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया जो देश भर के 25 राज्यों से आए थे। यहां रचनात्मक और आंदोलनात्मक कार्य करने वाले आपस में मिले और संवाद, सहमति तथा सहकार के जरिए आगे बढ़ने का माहौल तैयार हुआ। सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए श्री के.एन. गोविन्दाचार्य ने कहा, ”यहां बहुत से लोग अपने-अपने समूहाें के प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित हैं। उनके पास बताने के लिए बहुत कुछ है। यहां उपस्थित सभी लोगों के लिए उनका बताना बहुत उपयोगी होगा। यदि कोई जमीन के लिए काम कर रहा है, तो वह फसल के लिए काम करने वालों से बहुत कुछ सीख सकेगा। जो फसल के लिए काम कर रहा है, वह छोटे उद्योगों के बारे में सीख सकेगा। जो कारीगरी के लिए काम कर रहा है वह गायों के बारे में सीख सकेगा। जो किसानों के लिए काम कर रहा है, वह देश की सुरक्षा के बारे में सीख सकेगा। जो लोग व्यवस्था परिवर्तन के लिए काम कर रहे हैं तो उनके पास भी सीखने और सिखाने के लिए बहुत कुछ होगा। इन सबके साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार के बारे में बहुत लोग अपनी-अपनी जगह पर बहुत कुछ काम किये हुए हैं, जो आज यहां इकट्ठा हैं। इस मायने मे यह भारत विकास संगम है। यह भारत विकास संगम का सम्मेलन या अधिवेशन नहीं है। यह स्वयं में एक संगम है, जिसमें बहुत सारे लोग आये हैं और एक दूसरे से लाभान्वित हो रहे हैं। यह वास्तव में भारत के विकास को लेकर काम कर रहे लोगों का एक कुम्भ है।”
गुलबर्गा सम्मेलन (दिसंबर, 2010)
भारत विकास संगम का तीसरा सम्मेलन 23 दिसंबर 2010 से एक जनवरी 2011 तक कर्नाटक के गुलबर्गा में होना प्रस्तावित है। इसमें तकरीबन बारह लाख लोगों की सहभागिता रहेगी। इस सम्मेलन में लगभग 1000 जमीन से जुड़े संगठनों के भी आने की संभावना है। भारत के बहुआयामी विकास के लिए प्रयत्नशील व्यक्तियों एवं संस्थाओं का यह महासंगम होगा। बसवराज पाटिल के नेतृत्व में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इसी सिलसिले में गुलबर्गा में भारत विकास संगम के प्रांत प्रमुखों और जिला संयोजकों का अभ्यास वर्ग नौ और दस अगस्त, 2008 में आयोजित किया गया, जिसमें सोलह प्रदेशों के 62 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यहां वैश्विक सोच और स्थानीय पहल को मूल मंत्र बनाकर काम करने पर जोर दिया गया।
भारत विकास संगम के विचार को एक आंदोलन का रूप देने के लिए देश के पांच प्रमुख शहरों में इसके केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से लोगों एवं संस्थाओं को भारत विकास संगम के विचार की जानकारी दी जा रही है। साथ ही 2010 के गुलबर्गा सम्मेलन की तैयारियों का भी इन केन्द्रों से समन्वय किया जा रहा है। इन समन्वय केन्द्रों का विवरण इस प्रकार है:
दिल्ली
535, द्वितीय तल, डबल स्टोरी एरिया, निकट गीता मंदिर, न्यू राजेन्द्र नगर, नई दिल्ली-110060
दूरभाष : 011.28742395
ईमेल : bvs2010@gmail.com
श्री अजीत सडंगी
दूरभाष : 9910874834
ईमेल : ajitksarangi@gmail.com
श्री विपुल मिश्रा
ईमेल : deshratnavipul@yahoo.com
श्री पंकज कुमार
दूरभाष : 9811787626
ईमेल : pankaj633@rediffmail.com
बंगलुरु
नं.-7, समीप एंड्रिया वोलिंग्टन अपार्टमेन्ट,
रेलवे कालोनी, आर.एम.वी. एक्सटेंशन,
बंगलुरु, कर्नाटक-94
श्री भारती मग्दुम
दूरभाष : 09741964638, 09886514004
ईमेल : bharthimagdum@yahoo.co.in
श्री चंद्रशेखर धवलगी
दूरभाष : 0836-2251171, 09448111377,
ईमेल : cr_dhavalagi@rediffmail.com
श्री यू. भीमराव
दूरभाष : 09901668253
मुम्बई
501, 502, निकुंज बिल्डिंग,बी/एच-श्रीकृष्ण नगर,
बोरीवली (पूर्व) मुम्बई, महाराष्ट्र.400066
श्री संजय पटेल
दूरभाष : 022.28972560, 09320672560
ईमेल : skp863@gmail.com
श्री कौशिक बनर्जी
दूरभाष : 09920606809
भोपाल
मकान नं. 54, जोन-2, महाराणा प्रताप नगर,
भोपाल, मध्य प्रदेश-462011
श्री अनिल नेमा
दूरभाष रू 0755.2766201, 09300494833
ईमेल : akshayanema@rediffmail.com
श्री राकेश जैन
दूरभाष : 09425005033
ईमेल : nabalayaanubodh@gmail.com
श्री वैभव सुरंगे
दूरभाष : 09425071230
वाराणसी
केशरीपुर, समीप पी.ए.सी. गेट (पश्चिम),
पोस्ट-भूलनपुर पी.ए.सी. वाराणसी, उत्तर प्रदेश
श्री वासुदेवाचार्य
दूरभाष : 09451576399
श्री संजय शुक्ला
दूरभाष : 0542.2369122
श्री बालेन्दु मणि त्रिपाठी
दूरभाष : 09415376328
श्री जटाशंकर सिंह
दूरभाष : 09415228216
ईमेल : surabhishodhsansthan@yahoo.co.in
श्री चंद्रकांति पाल
दूरभाष : 09415817872
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